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मंगलवार, 2 मार्च 2010

रोबोट

पहले आदमी -आदमी था
वो हँसता था रोता था किसी के लिऐ
उस में संवेदना थी
दूसरे के लिऐ वेदना थी
आज आदमी- आदमी नहीं
वो हँसता नहीं
रोता नहीं किसी के लिऐ
वो संवेदनहीन है
पत्थर का स्टैचू है
कंप्युटर से दिमाग चलता है
स्वार्थ के लिऐ आंकङे फिट रखता है
आज आदमी- आदमी नहीं
शायद.... रोबोट है

सोमवार, 1 मार्च 2010

माँ

खिले फिर गुलाब
सावन भी बरसा
बीते दिन गए कहाँ
मन रह रह तरसा
फिर आई बहारे
भँवरे भी डोले
रूठे थे जो कल
ना आए फिर वो पल
सब कुछ है घर में
कँप्युटर पोर्च मे कार भी
माँ की दुआऐँ गयी कहाँ
जैसे नजरे थक गयी वहाँ

शुक्रवार, 17 जुलाई 2009

सवाल..सवाल.

कैसे पृथ्वी का जन्म हुआ


कैसे सूर्योदय हुआ


क्यों फिर रात आई


चाँद सितारों को साथ लाई


डायनासोर के काल में


पिरामिडों के साल में


दूर रेगिस्तान में


तूतनखामन के जाल में


मछली सा तडपता


मगरमच्छों से बचता


कैसे जन्म मेरा हुआ


एक सवाल माँ से पूछता


माँ ऊपर आकाश की ओर देखती......

सोमवार, 6 अप्रैल 2009

जीवन...


सफर एक गुलिस्ताँ का

काटों फूलो के साथ

गर घायल दिल भी है

तो फूल बिखरे हैं जिस्म-जिस्म

मुझ से मत पूछो अब कुछ

कैसे बीता ये जीवन

वो कहता है अच्छा

मैं कहता हूँ बस ठीक

ना शिकायत तुझ से

ना शिकवा किसी से कोई....।

गुरुवार, 19 फ़रवरी 2009

निंदिया सबसे प्यारी तू...लोरी व प्रभाती गीत संग्रह प्रकाशित


सुविख्यात बालकवि डा0 अजय जनमेजय का लोरी व प्रभाती गीत संग्रह - निंदिया सबसे प्यारी तू -अविचल प्रकाशन,बिजनौर से 18 फरवरी 2009 को प्रकाशित हो गया है इस संग्रह में 44 लोरियाँ व 20 प्रभाती गीत संग्रहीत हैं पुस्तक में सुदर लोरी व गीतों के साथ सुंदर चित्रांकन हरिपाल त्यागी व आवरण शकील बिजनौरी का है पुस्तक के पेपर बैक संसकरण का मूल्य -165 रू0 है
पुसतक की एक लोरी की बानगी देखिये...निंदिया तोरे, करूँ निहोरे
अब आ भी जा,अब आ भी जा
झम्मक झइयाँ झम्मक झइयाँ ।
मुन्ना रोए, पलके भारी
सोना चाहे तू आ जा री
आते-आते रूक मत जाना
ठइयाँ ठइय़ाँ ठइयाँ ठइय़ाँ ।
बनकर शीतल झोंका तू आ
खुशबू सारे उपवन की ला,
धीरे-धीरे आहिस्ता से
पइयाँ पइय़ाँ पइय़ाँ पइय़ाँ ।
जागेगा तब कुछ ठुनकेगा
गोदी को मेरी मचलेगा,
आकर गोदी में नाचेगा ।
छम्मक छइयाँ छम्मक छइयाँ ।

शनिवार, 3 जनवरी 2009

संयुक्त राष्ट्र...से क्या लाभ

कहाँ है संयुक्त राष्ट्र , जो कि बेकसूर फिलिसतीनियों के नरसंहार के लिये आक्रामक इस्राइल को कडा सबक सिखाने का साहस नहीं कर पाता उसे तो केवल इराक , अफगानिस्तान व ... ही दिखते हैं जो कि बेकसूर इराकीयों पर विशव के 28 देशों के साथ मिलकर हमला करते है संयुक्त राष्ट्र मोन है... ऐसे संयुक्त राष्ट्र का क्या लाभ

बुधवार, 31 दिसंबर 2008

नव वर्ष 2009 की शुभकामनाऐं..............


नव वर्ष 2009 सभी चिठठाकारों को मंगलमय हो